New Education Policy 2020 – केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा को नए प्रायोगिक आयाम तक पहुंचाने पर ज़ोर

new education policy 2020
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एम्.फिल और 10+2 शिक्षा पद्दति को हटाया गया,मात्र भाषा पर विशेष ध्यान

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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार अब 10+2 के शिक्षा पद्धिति को हटा कर 5+3+3+4 में तब्दील किया जाएगा

बुधवार, 29 जुलाई 2020 को, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रस्तुत की गयी है । यह 34 वर्षों में पहली नई शिक्षा नीति है, जो 2014 में भाजपा का एक चुनावी वादा था। इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक पैनल ने दिसंबर 2018 में एक मसौदा प्रस्तुत किया, जिसे 2019  में लोक सभा चुनाव के बाद प्रतिक्रिया के लिए सार्वजनिक किया गया। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति के साथ साथ मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है ।

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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार अब 10+2 के शिक्षा पद्धिति को हटा कर 5+3+3+4 में तब्दील किया जाएगा, जिसमे पहले 5 साल में प्रे-प्राइमरी शिक्षा (3 साल) के साथ फाउंडेशन कक्षा 1,2 की पढाई, फिर कक्षा 3,4,5 तक की पढाई तैयारी चरण के रूप में, फिर कक्षा 6,7,8 तक की पढाई मध्य शिक्षा के रूप में और अंतिम के 4 साल यानि कक्षा 9,10,11 और 12 की पढाई माध्यमिक सहारण के रूप में होगी।

New Education Policy 2020 के महत्वपूर्ण बिंदु

  • नयी नीति के अनुसार हर राज्य को तीन-भाषा के फॉर्मूले में अधिक लचीलापन देने की तयारी है, और किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी । बच्चों द्वारा सीखी गई तीन भाषाएं राज्यों, क्षेत्रों और निश्चित रूप से स्वयं छात्रों की पसंद होंगी, इसलिए जब तक तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारत के मूल निवासी हैं।
  • संस्कृत को स्कूल और उच्च शिक्षा के सभी स्तरों पर एक विकल्प के रूप में पेश किया जाएगा, नीति में कहा गया है कि अन्य शास्त्रीय भाषाएं भी ऑनलाइन मॉड्यूल के रूप में उपलब्ध होंगी, जबकि विदेशी भाषाओं को माध्यमिक स्तर पर पेश किया जाएगा।
  • नयी नीति के अनुसार जहां तक ​​संभव हो, कम से कम ग्रेड 5 तक अधिमानतः ग्रेड 8 और उससे आगे तक स्टूडेंट्स को शिक्षा उसकी घर की भाषा / मातृभाषा / स्थानीय भाषा / क्षेत्रीय भाषा में दी जाएगी और यह सार्वजनिक और निजी दोनों स्कूल होंगे पर लागू होगा ।
  • नयी शिक्षा नीति के अनुसार सरकार द्वारा 2040 तक सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को ‘मल्टी सब्जेक्ट इंस्टिट्यूशन’ बनाया जाएगा  जिसमें काम से काम 3000 से छात्र होंगे ।
  • नयी शिक्षा नीति के अनुसार 2030 तक हर जिले में या उसके पास कम से कम एक बड़ा ‘मल्टी सब्जेक्ट हाई इंस्टिट्यूशन’ बनाया जाएगा ।
  • प्री-स्कूल और आंगनवाड़ी वर्षों सहित एक नया पाठयक्रम ढाँचा पेश किया जाएगा । नेशनल मिशन द्वारा 2025 तक फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी से क्लास 3 लेवल पर बेसिक स्किल्स सुनिश्चित की जाएगी ।
  • स्टूडेंट्स को कोडिंग के साथ-साथ क्लास 6 से वोकेशनल एक्टिविटीज भी सिखाई जाएगी ।
  • नयी नीति के अनुसार, आदिवासी और स्वदेशी ज्ञान सहित भारतीय ज्ञान प्रणाली को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा और कक्षा 6 से व्यावसायिक शिक्षा का एकीकरण शामिल है।
  • कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं को आसान बना दिया गया है, अब उनकी पढाई का मापन याद किए गए तथ्यों के बजाय मुख्य दक्षताओं का परीक्षण करने से होगा, सभी छात्रों को दो बार परीक्षा देने की अनुमति दी गई है और बोर्ड परीक्षाओ को मॉड्यूलर रूप में कराया जा सकता हैं।
  • नई शिक्षा नीति के अनुसार विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन टेस्ट या आम प्रवेश परीक्षा होगी जिसे  नेशनल टेस्ट‍िंग एजेंसी कराएगी ।
  • पुराने स्कूली प्रशासन को हटा कर एक एक स्वतंत्र प्राधिकरण बनाया जाएगा जिस से नए मान्यता ढांचे द्वारा सार्वजनिक और निजी स्कूलों को विनियमित किया जाएगा ।
  • कानूनी और चिकित्सा क्षेत्र की शिक्षा को छोड़कर अन्य सभी शिक्षाओं की देखरेख करने के लिए एक सामान्य उच्च शिक्षा नियामक भी बनने का प्रस्ताव है ।
  • प्राइवेट इंस्टुटुटेस द्वारा अधिक शुल्क को नियंत्रित करने के लिए भी एक व्यापक रूपरेखा तैयार की जाएगी।
  • स्नातक की शिक्षा को अधिक समग्र और बहु-विषयी बनाने की तयारी है , 3 साल के स्नातक को चार साल के स्नातक के साथ अनुसंधान की डिग्री में तब्दील किया जाएगा, हालांकि जो छात्र पहले के सालो में शिक्षा बीच में छोड़ते हैं, उन्हें कम योग्यता प्रदान की जाएगी। जैसे 1 साल पर सर्टिफिकेट, 2 साल पर डिप्लोमा और 3-4 साल पर डिग्री प्रदान की जाएगी ।
  • संस्थानों के बीच स्थानांतरण को आसान बनाने के लिए एक अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की स्थापना की जाएगी।
  • एम.फिल की डिग्री को खत्म किया जा रहा है।
  • कॉलेज संबद्धता प्रणाली को अगले 15 वर्षों में पूरा किया जा रहा है, ताकि हर कॉलेज या तो एक स्वायत्त डिग्री देने वाली संस्था, या एक विश्वविद्यालय के एक घटक कॉलेज के रूप में में विकसित हो जाये ।
  • COVID-19 महामारी के मद्देनजर शिक्षा में ‘प्रौद्योगिकी’ पर नया ध्यान केंद्रित किया गया है और नीति में स्कूलों और विश्वविद्यालयों दोनों पर digitalization की सिफारिश की गई है।

नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा सरकार ने कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देने का प्रयास किया है और स्टूडेंट्स के समग्र व्यक्तित्व विकास को ध्यान रखते हुए और किताबी ज्ञान से ज्यादा प्रैक्टिकल ज्ञान पर तबज्जो दी है।

5 Comments on “New Education Policy 2020 – केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा को नए प्रायोगिक आयाम तक पहुंचाने पर ज़ोर”

  1. हालांकि कुछ राजनीतिक दलों द्वारा श्री शिक्षा नीति पर कुछ विरोध किया जा रहा है देखना है यह कब और कैसे लागू होती है

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