राम मंदिर: एक नज़र में जाने राम मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक बातें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भूमि एवं शिला पूजन किया जाना है

राम मंदिर: प्राचीन भारतीय महाकाव्य, रामायण के अनुसार, मर्यादा पुरषोतम प्रभु राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। तभी से अयोध्या को राम जन्मभूमि या राम की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है। 15 वीं शताब्दी में मुगलों ने राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया। मंदिर की जगह मस्जिद से शुरू हुआ ये विवाद कई दशक तक चलता रहा। हिन्दू समाज हमेशा से वहा राम मंदिर का पक्ष रखता रहा और जोर डाला की यह भूमि प्रभु श्री राम का जन्म स्थल है अर्थात यहाँ राम मंदिर बनना चाहिए। वहीं मुस्लिम समाज हमेशा बाबरी मस्जिद के पक्ष में था।

आइये जानते है राम मंदिर से जुडी खास बातें

मंदिर-मस्जिद विवाद

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद आजादी मिलने के तीन साल बाद से ही शुरू गया था। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु, केंद्रीय गृहमंत्री सरदार पटेल और उत्तर प्रदेश के गृहमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने राम मंदिर मुद्दे में हस्ताक्षेप किया अन्यथा 42 साल पहले ही बाबरी मस्जिद ढह चुकी होती।

सरदार पटेल इस मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से हल चाहते थे। वे आपसी सहनशीलता और भाईचारे के पक्ष में थे। वह चाहते थे कि यह मामला मुस्लिम पक्ष की सहमती से हल हो. पंडित नेहरू पहले जैसी स्थिति अयोद्धा में बहाल हो के पक्ष में थे. इसके लिए उन्होंने उस वक्त की यूपी सरकार से बात की और निर्देश दिए की अयोध्या में पहले जैसी शांति बनी रहें। लेकिन ऐसा हो ना सका और यह मामला कोर्ट में चला गया। दिसंबर, 1959 में निर्मोही अखाड़ा द्वारा एक याचिका कोर्ट में दाखिल हुई. अखाड़े की ओर से कहा गया कि मस्जिद से पहले वहां पर मंदिर था और ज़मीन अखाड़े की थी. इसलिए मंदिर और संपत्ति की देखरेख का काम अखाड़े को दे दिया जाए. 1961 में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड भी अदालत पहुंच गया. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का कहना था की मस्जिद और उसके आस-पास की ज़मीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की है. इसलिए मालिकाना हक उसे दिया जाए और मूर्तियों के साथ ही पूजा-पाठ की चीजों को मस्जिद के अंदर से हटाया जाए. केस चलता रहा और स्थिति कायम रही. 6 दिसंबर, 1992 को मस्जिद गिराई गई थी तब से यह विवाद कई दशक तक चलता रहा।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहास्तिक फैसला

लम्बे समय से चले आ रहे मंदिर-मस्जिद विवाद को बीजेपी सरकार ने सत्ता में आते ही कोर्ट को इस मामले में जल्द से जल्द निपटाने के लिए कहा गया। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल रहे। 5 जजों ने 40 दिन तक अयोध्या मामले पर सुनवाई की और अंत में 9 नवम्बर 2019 को राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया गया.

मंदिर निर्माण कार्य
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया। ट्रस्ट की देख रेख में मंदिर का निर्माण किया जायेगा। श्री राम जन्मभूमि पर भव्य-दिव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन बुधवार को होना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भूमि एवं शिला पूजन किया जाना है, इस दौरान कई विशिष्ट लोग इसके साक्षी बनेंगे। मंदिर के भव्य निर्माण से पहले ही मंदिर का मॉडल सामने आगया है। मंदिर के पहले मॉडल में दो गुंबद और शिखर बने थे। लेकिन नए मॉडल में गुंबदों की संख्या पांच कर दी गई है। शिखर की ऊंचाई 161 फीट की गई है। मंदिर में हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को बैठने की जगह मिलेगी। राम मंदिर का निर्माण जिस दिन से शुरू होगा, उस दिन से करीब तीन या साढ़े तीन साल का वक्त लगेगा। भव्य मंदिर के निर्माण के लिए समाज से धन संग्रह किया जाएगा।

मंदिर का मॉडल
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने बताया था कि राम मंदिर प्रारूप के भू-तल वाले हिस्सों के पत्थरों की तराशी पूरी हो चुकी है। इसके अलावा मंदिर में 212 खंभे होंगे। जिसमें से पहली मंजिल में 106 खंभे और दूसरी मंजिल में 106 खंभे बनाए जाएंगे। प्रत्येक खंभे में 16 मूर्तियां होंगी और मंदिर में दो चबूतरे भी होंगे। मंदिर का परिसर बहुत ही भव्य है और इसमें करीब 50 हजार श्रद्धालु एक साथ पूजा कर सकते हैं।

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