नहीं रहे मशहूर शायर राहत इंदौरी

Death of Famous Poet Rahat Indori
Spread the love
https://images.jansatta.com/2020/08/Rahat-Indori-620x400.jpg?w=680&h=439  Death of Famous Poet Rahat Indori
Image courtesy: jansatta.com

मशहूर शायर(Famous Poet) और इंदौर(Indore) की बुलंद आवाज़ राहत इंदौरी(Rahat Indori) हमारे बीच नहीं रहे(Death), उनका दिल का दौरा पड़ने से मंगलवार शाम 5 बजे निधन हो गया। 1950 में जन्मे राहत इंदौरी गीतकार(lyricist) और उर्दू के मशहूर शायर थे, उन्होंने घातक, नाराज़, मुन्ना भाई एमबीबीएस(Munnabhai MBBS) जैसी नामी फिल्मों के गानों के लिरिक्स(lyrics) भी लिखे है। राहत जी की हालत पहले से ही खराब चल रही थी जब हालत और बिगड़ने लगी तो उन्हें 9 अगस्त को देर रात श्रीअरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया।

राहत साहब कोरोना से भी संक्रमित थे, इसकी जानकरी उन्होंने खुद ट्वीट करके बताई थी, उन्होंने लिखा था – ” कोविड के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है. ऑरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूं, दुआ कीजिये जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं. एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी ख़ैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती रहेगी”।

राहत साहब के गुज़र जाने की खबर के बाद साहित्य और फिल्म जगत की हस्तियों ने शोक व्यक्त किया, मध्य प्रदेश के सीएम श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राहत साहब के निधन पर शोक व्यक्त किया। 11 अगस्त की रात्रि में रहत साहब को छोटी खजरानी स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

आप भी पढ़िए राहत साहब के कुछ मशहूर कविताएँ:

बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं


अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है।

लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन,
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है।

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाकत है,
हमारे मुंह में तुम्हारी जुबान थोड़ी है।

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे,
किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है।

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।


बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए

अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में
है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए

दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं
दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए

मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना
तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए

मैं फूल हूँ तो फूल को गुल-दान हो नसीब
मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए

मैं ताज हूँ तो ताज को सर पर सजाएँ लोग
मैं ख़ाक हूँ तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए

मैं जब्र हूँ तो जब्र की ताईद बंद हो
मैं सब्र हूँ तो मुझ को दुआ देनी चाहिए

मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे
मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए

सच बात कौन है जो सर-ए-आम कह सके
मैं कह रहा हूँ मुझ को सज़ा देनी चाहिए

फिर वही मीर से अब तक के सदाओं का तिलिस्म
हैफ़ राहत कि तुझे कुछ तो नया लिखना था

अभी तो कोई तरक़्की नहीं कर सके हम लोग
वही किराए का टूटा हुआ मकां है मिया

अब के जो फैसला होगा वह यहीं पे होगा
हमसे अब दूसरी हिजरत नहीं होने वाली

मेरी ख़्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे
मेरे भाई मेरे हिस्से की ज़मी तू रख ले

बुलाती है मगर जाने का नईं
वो दुनिया है उधर जाने का नईं

“मैं मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना
लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना।
शाख़ों से टूट जाएँ, वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे”

“आँख में पानी रखो होंठों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं”

“किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है
आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था

मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना
मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था”

3 Comments on “नहीं रहे मशहूर शायर राहत इंदौरी”

  1. राहत साहब के शायरी के साथ विवरण बहुत सुन्दर बेवाक शायर को श्रद्धांजलि

  2. सड़क दो का ट्रेलर रिलीज हो गई है लेकिन सुशांत के मौत की वजह से कुछ खास लाईक नहीं की गई ह

  3. सोवियत रूस ने कोरोना का टीका बंना लिया है लेकिन न तो डब्लू एच ओ और न कोई अन्य देश इसे मान्यता दे रहे हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *