ओणम महोत्सव 2020: इतिहास एवं महत्व

Onam Festival 2020: History and Importance
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ओणम त्यौहार(Onam Festival) केरल प्रदेश के प्रमुख और पॉप्यूलर त्यौहारों में से एक है और इसे वहा के निवासी बड़े हर्ष और उल्लास(history) से मनाते है। यह त्योहार हर साल अगस्त से सितंबर माह तक मनाया जाता है। यह एक फसल-उत्सव(Importance) है, जो अगस्त से सितंबर के महीने के मध्य पड़ता है, मलयाली कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार चिंगम माह के 22 वे नक्षत्र थिरुवोनम पर पड़ता है जोकि मलयालम वर्ष की शुरुआत माना जाता है और उसे कोला वर्शम कहते है।

क्या है इस त्योहार को मानाने के पीछे की कहानी

ओणम त्यौहार दयालु और अति-प्रिय दानव राजा महाबली के सम्मान के उपलक्ष में मनाया जाता है, जिनके बारे में यह मान्यता है कि वे इस त्यौहार के दौरान केरल लौटते हैं।
वैष्णव पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा महाबली ने देवताओं को हराया और तीनों लोकों पर शासन भी किया। राजा महाबली एक राक्षस राजा थे और असुर जनजाति के थे। दयालु राजा लोगों से बहुत प्यार करते थे, यह सब देख देवता खुद को राजा महाबली से असुरक्षित महसूस करने लगे और उन्होंने भगवान श्री विष्णु से मदद मांगी। तब भगवान विष्णु ने ब्राह्मण वामन के रूप में अपना पांचवा अवतार लिया और राजा महाबली को दर्शन दिए। जब राजा महाबली ने वामन से पूछा कि वह क्या चाहता है तो वामन ने जवाब दिया, “तीन कदम भूमि के टुकड़े”। राजा ने इच्छा स्वीकार कर वामन को जमीन नापने को कहा , तो वे आकार में बढ़ते चले गए और क्रमशः अपनी पहले और दूसरे कदम में, पहले आकाश और फिर धरती व पाताल लोक को ढक लिया।

कुछ भी न बच पाने की अवस्था में जब भगवान विष्णु अपना तीसरा कदम लेना चाहते थे , तब राजा महाबली ने अपना सिर भगवान को अर्पित कर दिया। इस कार्य ने भगवान विष्णु को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने हर साल ओणम उत्सव के दौरान महाबली को अपने राज्य और लोगों से भेंट करने का अधिकार दे दिया।

ओणम की रस्में

इस दस दिवसीय उत्सव के दौरान, भक्त जन स्नान करते हैं, प्रार्थना करते हैं, पारंपरिक कपड़े पहनते हैं – महिलाएँ घर में कासावु साड़ी नामक एक सफ़ेद और सोने के रंग वाली साड़ी पहनती हैं – परंपरिक नृत्य में भाग लेती हैं, फूल रंगोली बनती हैं, जिसे पूक्कलम कहा जाता है और पारंपरिक दावतें बनाती हैं, जिन्हें सदिया कहा जाता है इस भोजन को केले के पत्तों पर परोसा जाता है।

इस त्योहार में लोग बोट प्रतियोगिता या वल्लम काली, शेर नृत्य जिसे पुलीकली भी कहते है, भगवान की पूजा करते हैं या ओनाथप्पन, टग ऑफ वार, थुंबी थुल्लल या महिलाओं के नृत्य की रस्म, मास्क नृत्य या कुम्माटिकली, ओनहल्लू या मार्शल आर्ट, आदि में भाग लेते है।

पारंपरिक दावत

पारंपरिक ओणम सदिया (दावत) एक 9-कोर्स भोजन है जिसमें 26 व्यंजन होते हैं। इसमें कलन (एक शकरकंद और नारियल करी डिश), ओलान (नारियल करी में तैयार सफ़ेद लौकी), अवियल (नारियल की सब्जी में मौसमी सब्जियाँ), कूटू करी (छोले से बनी डिश), रसम (एक सूप जैसा व्यंजन, टमाटर और काली मिर्च के साथ बनाया गया, चावल और अन्य तैयारियों के साथ खाया जाता है) और बहुत पसंद की जाने वाली मिठाई -पारिपु पायसम (एक चावल की खीर)।

ओणम के 10 दिन जो राज्य भर में त्योहार के उत्सव का प्रतीक है:

पहले दिन को अथम कहा जाता है, यह दिन त्योहार की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन घरों को पीले फूल यानी की पूकलम कहते है।

दूसरे दिन को चिथिरा कहा जाता है इस दिन घर की सफाई करने का रीवाज है, इसमें पूकलम की एक और परत चढ़ाई जाती है।

तीसरे दिन को चोदी कहते है, इस दिन लोग शॉपिंग व एक दूसरे को उपहार बाटते हैं इसे ऑनाकोड़ी कहा जाता है।

चोथे दिन को विशाखम कहते है, इस दिन सारे दिनों में सबसे शुभ माना जाता है, इस दिन ओनाश्या या ओणम की दावत की तैयारी शुरू होती है।

पाचवे दिन को अनीज़म कहते है, इस दिन नाव की रेस (वल्लमकली) होती है, यह रेस पठानमथिट्टा में पम्बा नदी के तट पर स्थित एक छोटा शहर है वहा पे होती है।

6 दिन यानी थ्रीकेटा, इस दिन बच्चों के स्कूल बंद हो जाते है और सभी लोग उत्सव के कार्यों में लग जाते है।

सातवे दिन को मूलम कहते है, इस दिन को ओना सद्य की शुरुआत और नृत्य प्रदर्शन की माना जाता है और राज्य को सजाया भी जाता है।

आठवें दिन को पूरमम कहा जाता है, इस दिन वामन भगवान और राजा महाबली की मूर्तियों को पूक्कलम स्थापित किया जाता है।

नौवें दिन उथरादोम कहते है, इस दिन सभी लोग ताजी सब्जियों के साथ परंपरिक भोजन पकाते है। इस दिन यह माना जाता है कि राजा महाबली अपने राज्य में पधारते है।

आखरी दिन, दिन 10, इस दिन को तिरुओणम कहते है, इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और मंदिर जाते है, इस दिन लोग एक दूसरे को उपहार भी देते है और घरों में थिरूना सद्य (ओणम के लिए विशेष भोजन) भी बनाया जाता है। राज्य भर नृत्य और विभिन्न प्रतिोगिताएं आयोजित की जाती है।

आशा करते है हमने आपको पूर्ण जानकारी दी है, Jan Awaz की तरफ से सभी हो ओणम की हार्दिक शुभकामनाएं।

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