ICICI Bank-Videocon Money laundering case of 3250 Cr – Deepak Kocchar (Chanda Kocchar’s husband) arrested by ED

ICICI Bank-Videocon Money laundering case – PTI की खबर के अनुसार Enforcement Directorate (ED) ने आज सोमवार 7 SEPTEMBER को आईसीआईसीआई बैंक के वीडियोकॉन मनी लॉन्ड्रिंग केस में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ और एमडी चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को जांच और पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लिया।

ICCI Bank-Videocon Money laundering case
Deepak Kocchar arrested in ICCI Bank-Videocon Money laundering case, photo@ yahoonews

ED ने कहा की दीपक कोचर को मुंबई में Prevention of Money Laundering Act (PMLA) की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है और उम्मीद है कि उन्हें हिरासत में लेने के लिए मंगलवार तक उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया जा सकता है। पिछले साल जनवरी में धनशोधन रोधी कानून के आपराधिक धाराओं के तहत दायर केस में ये गिरफ्तारी की गयी है और एजेंसी इस मामले में जुटाए गए कुछ नए सबूतों के बारे में अधिक जानकारी हासिल करना चाहती है।

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ED ने CBI द्वारा दर्ज FIR का अध्ययन करने के बाद अपना मामला दर्ज किया था जिसमे कोच्चर युगल, वीडियोकॉन समूह के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत और अन्य के खिलाफ कंप्लेंट है । इसने कोचर और उनकी व्यापारिक संस्थाओं के खिलाफ ‘वीडियोकॉन ग्रुप ऑफ कंपनियों को 1,875 करोड़ रुपये के ऋण की अवैध मंजूरी’ के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का अरूप लगाया गया है ।

ईडी ने पहले कहा था कि चंदा कोचर की वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा मंजूर की गई 300 करोड़ रुपये की ऋण राशि में से 64 करोड़ रुपये की राशि को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड को नूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) को हस्तांतरित कर दिया गया था। 8 सितंबर 2009, आईसीआईसीआई बैंक द्वारा ऋण के वितरण के ठीक एक दिन बाद। NRPL को पहले NuPower Renewables Limited (NRL) के नाम से जाना जाता था और यह दीपक कोचर की कंपनी है, जिनपे आरोप लगाया गया की इन दागी निधियों से NRPL द्वारा 10.65 करोड़ रुपये का शुद्ध राजस्व उत्पन्न किया गया था ’।

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ICCI Bank-Videocon Money laundering case previous developments – इस वर्ष की शुरुआत में चंदा कोचर, दीपक कोचर और उनके स्वामित्व वाली और नियंत्रित कंपनियां और मुंबई के फ्लैट सहित, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में स्थित विंड फार्म प्रोजेक्ट की जमीन, और प्लांट और मशीनरी – की संपत्ति को भी अटैच किया था जिनका मूल्य 78 करोड़ रुपये था।। एजेंसी के अनुसार चंदा कोचर और उनके परिवार ने मुंबई अपार्टमेंट का अधिग्रहण किया था, जिसका स्वामित्व वीडियोकॉन ग्रुप की एक कंपनी के पास था, ‘उस कंपनी को अपने पारिवारिक ट्रस्ट के माध्यम से मामूली कीमत पर और किताब प्रविष्टियां बनाकर’ हासिल कर लिया गया ।

CBI ने अपनी एफआईआर में चंदा कोचर, दीपक कोचर, धूत और उनकी कंपनियों- वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (VIEL) और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (VIL) का नाम लिया है और इसके सम्बन्ध में कोच्चर दंपत्ति से केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुंबई और दिल्ली में अपने कार्यालयों में अतीत में कई बार पूछताछ की है।।

FIR में दीपक कोचर द्वारा नियंत्रित कंपनी, नूपावर रिन्यूएबल्स और सुप्रीम एनर्जी जिसकी स्थापना धूत ने की थी का नाम एफआईआर में दर्ज है। सीबीआई ने सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराओं को लागू किया है।

सीबीआई ने आरोप लगाया कि धूत ने दीपक कोचर की कंपनी नूपावर में अपनी फर्म सुप्रीम एनर्जी के माध्यम से निवेश किया था, जो कि आईसीआईसीआई बैंक द्वारा चंदा कोचर द्वारा 1 मई, 2009 को बैंक के सीईओ के रूप में कार्यभार संभालने के बाद लोन के लिए एक प्रमुख समर्थक है। नूपावर और सुप्रीम एनर्जी के स्वामित्व ने दीपक कोचर और धूत के बीच साझा लेनदेन के एक जटिल माध्यम से लें देन किया।

अपनी प्रारंभिक जांच के दौरान, CBI ने पाया कि वीडियोकॉन समूह को 1,875 करोड़ रुपये के छह ऋण मंजूर किए गए और जून, 2009 और अक्टूबर, 2011 के बीच आईसीआईसीआई बैंक की निर्धारित नीतियों के कथित उल्लंघन में कंपनियों को इससे जोड़ा गया।

सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि इन निजी समूह कंपनियों के खातों में मौजूदा बकाया राशि को 26 अप्रैल, 2012 को कंसोर्टियम व्यवस्था के तहत घरेलू ऋण के पुनर्वित्त के तहत आईसीआईसीआई बैंक द्वारा स्वीकृत 1,730 करोड़ रुपये के रूपए के सावधि ऋण में समायोजित किया गया था। वही 2012 में ऋण को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित किया गया था, जिससे बैंक को 1,730 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और जिसकी पूछताछ का अगला क्रम है दीपक कोच्चर के साथ होगा।

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