Indian Media and their dirty TRP Game: क्या TRP के लालच में मीडिया ने सुशांत सिंह राजपूत केस से लेकर हाथरास गैंगरेप तक फैलाया झूठ का जाल ?

Indian Media and their dirty TRP Game : Game of Thrones की ही तरह इंडियन मीडिया में भी टीआरपी का गेम खेला जा रहा है, जहा जंग सिर्फ कुर्सी पाने की है, लोग तेजी से मीडिया की पवित्र छवि में विश्वास खो रहे हैं, भारतीय मीडिया अपनी विश्वनीयता खोता जा रहा है, हमारी मीडिया के हिसाब से जो देर से दिखाया गया वो बेकार हो गया । टीआरपी के लिए लालच और फर्जी खबरों को दिखाने के लिए दौड़ ने आम लोगों के बीच भारतीय मीडिया पर विश्वास की कमी को बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश में हाथरस (Hathras Gangrape and Murder Case) की घटना हो या बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के कथित आत्महत्या का मामला मीडिया के पल-पल बदलते चेहरों ने जनता को असमंजश में डाल दिया है।
पहले के जामने में कहा जाता था कि कलम तलवार की तुलना में शक्तिशाली है, लेकिन इस शक्ति में धीरे-धीरे गिरावट आई है। अब, नाटकीय तत्व ने पत्रकारिता में एक मूक प्रवेश कर लिया है। टीआरपी को हथियाने के लिए सच्ची खबरों को कम किया जाता है और इन फर्जी खबरों ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को और कमजोर कर दिया है। इस चौथे स्तंभ के साथ ही अन्य स्तंभों में भी गिरावट देखी जा रही है। शकितशाली और शक्तिशाली होता जा रहा है और कमजोर और कमजोर और मीडिया का इसमें बहुत बड़ा हाथ है जिसको झुठलाया नहीं जा सकता है।
दोनों मामलों में, मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से सच्चाई को सामने आने देना चाहिए था, लेकिन टीआरपी के नाम पर, और फर्जी खबरों के मद्देनजर लोगों का ज्यादातर ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए एक होड़ लगी है, और जल्दी से जल्दी खबर प्रदान करने के प्रयास में पीड़ितों के लिए न्याय माँगना छोड़ सब अपने हितो को पूर्ण करने में प्रयासरत है ।
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सुशांत सिंह राजपूत और हाथरस में एक 18 वर्षीय लड़की की मौत के मामलों में, पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए इन परिवारों की मांग को रिपोर्टों के आधार पर होना चाहिए था, लेकिन मीडिया में घटनाक्रम ठीक इसके विपरीत दिशाओं में ही चलता है जहा खबर को एंटरटेनमेंट शो की तरह दिखाया जाता है , हर लाइन में पंच , हर लाइन को एनिमेटेड होकर गुस्से, डर और आक्रोश की भावनाओं में लपेट कर परोसा जाता है जैसे हर पल किसी सीरियल के परत दर परत कोई राज खोले जा रह है ।
Indian Media and their dirty TRP Game – Indian Media Drama in SSR Case
अगर हम बात करे सुशांत सिंह राजपूत के मामले में, पटना में दर्ज FIR में कहीं भी हत्या का उल्लेख नहीं है और यहां तक कि सुशांत के परिवार ने भी यह नहीं कहा, लेकिन मीडिया का एक वर्ग इसे हत्या का मामला साबित करने के लिए दृढ़ है। वही दूसरी ओर हाथरस मामले में, हालांकि, किसी भी मेडिकल रिपोर्ट ने बलात्कार की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यहां मीडिया का एक वर्ग इसे किसी भी कीमत पर सामूहिक बलात्कार का मामला साबित करना चाहता है। तथ्य यह है कि बलात्कार के बारे में लड़की का बयान बाद में आया और पुलिस ने तब FIR में संशोधन किया, लेकिन जांच अभी तक साबित नहीं हुई है।

सुशांत सिंह राजपूत मामले में भी सच्चाई का इंतजार किया जा रहा है। अभिनेता की मौत के कारणों की जांच के लिए AIIMS में डॉक्टरों का एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया था। कुछ समाचार चैनलों ने दावा किया कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की, जबकि अन्य ने कहा कि अभिनेता को मार दिया गया है।
हालांकि, AIIMS Medical Board ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उसने CBI को यह रिपोर्ट सौंपी है, जिसने यह भी बयान जारी किया है कि वह अभी भी हर कोण से मामले की जांच कर रही है। AIIMS और CBI को इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था क्योंकि समाचार चैनलों की टीआरपी की लड़ाई में दोनों संगठन पर चौतरफा बयान बाजी हो रही थी ।
Indian Media and their dirty TRP Game – Indian Media Drama in Hathras Gangrape Murder Case

हाथरस की घटना में उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में कई FIR दर्ज की हैं, जिसमें राज्य में जाति आधारित हिंसा को ट्रिगर करने की गहरी साजिश का हवाला दिया गया है। FIR में मीडिया के एक वर्ग का भी नाम लिया गया है, अज्ञात नेताओं ने सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने के लिए कुछ राजनेताओं के साथ कथित तौर पर परिवार को 50 लाख रुपये देने का लालच दिया।
FIR के अनुसार, कुछ लोग बार-बार मीडिया और सोशल मीडिया में बलात्कार के बारे में बात कर रहे हैं जबकि बलात्कार की न तो फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई है और न ही मेडिकल रिपोर्ट में।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की CBI जांच की सिफारिश की है, लेकिन पीड़ित परिवार आश्चर्यजनक रूप से ऐसा नहीं चाहता है। बल्कि, उन्होंने मांग की कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।
हालांकि मीडिया और राजनीतिक दलों का एक वर्ग हाथरस की घटना को अपना रंग देने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, लेकिन एक सच यह भी है कि पीड़ित और मुख्य आरोपी संदीप सिंह पुराने परिचित थे। इसी बीच 5 घंटे के कॉल डिटेल्स (जो पिछले अक्टूबर से मार्च के बीच हुई है) निकालने से ये पता चला है दोनों एक दूसरे को जानते थे , लेकिन पीड़ित के बड़े भाई ने प्रमुख आरोपियों से कभी भी बात करने से इनकार कर दिया।
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तथ्यों के आधार पर ये सवाल उठता है कि अगर भाई बात नहीं करते तो आरोपी से बात कौन करता था । वही दूसरी तरफ गांव के निवासियों ने आरोपी और पीड़ित के बीच एक संभावित प्रेम संबंध की ओर भी संकेत किया। अन्य आरोपियों के परिवार के सदस्यों ने अपने परिजनों की मासूमियत के बारे में बात की और पीड़ित के कथित सामूहिक बलात्कार से इनकार किया।
इस विवादास्पद मामले में हाथरस पुलिस भी एक तृतीय पक्ष है। इसने मामले को दबाने की कोशिश की थी और परिवार की अनुमति के बिना कथित रूप से रात के अंधेरे में पीड़ित के शव का अंतिम संस्कार किया था। उन्होंने आगे गलती की और मीडिया और नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने से रोका। पीड़ित परिवार को अपना घर भी नहीं छोड़ने दिया गया।
बड़ा सवाल अब भी बड़ा है कि क्या पीड़िता के साथ बलात्कार हुआ था? अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल की फॉरेंसिक रिपोर्ट ने इसे साबित नहीं किया है। बल्कि, रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ित के साथ मारपीट की गई थी।
Indian Media and their TRP Game – Only TRP is in the mind
दोनी ही केस में सत्य और सवाल अपनी जगह पर है पर हमारे इंडियन मीडिया की टीआरपी के लिए दिखाए जा रहे घटिया न्यूज़ से लोगो के बीच नाही सत्य पहुंच रहा नाही पीड़ित परिवार को इन्साफ मिल रहा और ड्रामा नित रोज़ नया नया हो रहा तथ्यों की अनदेखी करके, झूठ का यह कारोबार अधिकतम टीआरपी हथियाने के लिए एक विस्तार की होड़ में है। असत्य का वायरस बहुत तेजी से फैल रहा है और लोग मूकदर्शक बने हुए हैं। यह परिवर्तन घातक है और हमारे राष्ट्र के भविष्य पर एक घातक प्रहार है।
Fake media news hoti ha bus ab
Sach m sab trp ke lalach m hi karte h
Media ager thik se kam kare to sudhar ho sakta hai….
Trp K chakkar me kuchh bhi ….
मामला ठंडा पड़ता देख कांग्रेस ने दंगा भड़काने और योगी सरकार को बदनाम करना शुरू कर दिया जैसा कि आज आर_भारत द्वारा अलीगढ़ के कांग्रेसी नेता शयोराज जीवन बाल्मीकि का
स्टिंग ऑपरेशन दिखाया है